संक्षिप्त-परिचय

 

        कल-कल निनादिनी भगवती भगीरथी के पावन कूल पर अवस्थित इस महाविद्यालय की स्थापना सन् 1961 में भारत रत्न स्व. पं. गोविन्द बल्लभ पंत के यशस्वी नाम पर स्वामी दयानन्द जी द्वारा की गई थी। उस समय बदायूॅं, एटा, कासगंज आदि निकटवर्ती स्थानों पर कहीं भी उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं थी। अतः इस दृष्टि से उक्त महाविद्यालय बदायूॅ जिले का ही नहीं, वरन् निकटवर्ती जिलों का भी प्रथम एवं प्रेरक महाविद्यालय था। वर्तमान में भी अध्यापन एवं अनुशासन के लिए अपना विशिष्ट स्थान रखता है।

 नगर के कोलाहल, भीड़ तथा प्रदूषण से सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का यह महाविद्यालय अपने शान्त, एकान्त वातावरण एवं शुद्ध पर्यावरण के लिये विख्यात है, जहॉं धर्म एवं जाति के भेदभाव से रहित छात्र/छात्राओं के लिये समान शिक्षा का प्रबन्ध है। एम. जे. पी. रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली से सम्बद्ध यह महाविद्यालय सचिव/प्रबन्धक श्री रामशंकर भारद्धाज की देख रेख तथा प्राचार्य डॉ अनिरूद्ध सिंह यादव के कुशल नेतृत्व एवं प्रशासकीय क्षमताओं के द्धारा संचालित कला संकाय में स्नातक स्तर तथा अंग्रेजी एवं राजनीजि विज्ञान में स्नातकोत्तर विभिन्न विषयों में उत्तम शिक्षा प्रदान कर रहा है।

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